Saturday, June 7, 2014

...तो हम ख़ुदा को बर्खास्त करते है

अगर कोई मज़हब किसी मजलूम के क़त्ल की इजाज़त देता है, तो ऐसे मजहब में सर जिसकी इबादत में सजदे करते है, वह एक शैतान ही हो सकता है, खुदा नहीं|
किसी मजलूम के क़त्ल की बुनियाद कोई भी हो, काम यह मुसलसल बे-ईमानी है, ये लोग खुदा के बन्दे नहीं हो सकते, ये नाहक ख़ुद को मुसलमान कहते है | जो वाकई मुसलमान हैं, वो मजहब के नाम पर किसी मजलूम का क़त्ल जैसी घटिया और शैतानी इबादत सी हरकते नहीं करते |

एक आदमी की जान से जादा कीमती मज़हब नहीं होता, ऐसी हरकते हमारे मजहब को बजबजाता नाबदान बना देती है | फ़साद करते हुए क़त्ल ओ गारत करना खुदाई मजहब नहीं है |

अगर वाकई खुदा ऐसे किसी क़त्ल की इजाज़त देता है, तो क़यामत के वक़्त इन हत्यारों और इनके खुदा का फ़ैसला, हमारे जैसे अमन पसंद लोग करेगे |
...और तबतक के लिए, ऐसे खुदा को हम बर्खास्त करते है|

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कश्यप किशोर मिश्र


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