किसी मजलूम के क़त्ल की बुनियाद कोई भी हो, काम यह मुसलसल बे-ईमानी है, ये लोग खुदा के बन्दे नहीं हो सकते, ये नाहक ख़ुद को मुसलमान कहते है | जो वाकई मुसलमान हैं, वो मजहब के नाम पर किसी मजलूम का क़त्ल जैसी घटिया और शैतानी इबादत सी हरकते नहीं करते |
एक आदमी की जान से जादा कीमती मज़हब नहीं होता, ऐसी हरकते हमारे मजहब को बजबजाता नाबदान बना देती है | फ़साद करते हुए क़त्ल ओ गारत करना खुदाई मजहब नहीं है |
अगर वाकई खुदा ऐसे किसी क़त्ल की इजाज़त देता है, तो क़यामत के वक़्त इन हत्यारों और इनके खुदा का फ़ैसला, हमारे जैसे अमन पसंद लोग करेगे |
...और तबतक के लिए, ऐसे खुदा को हम बर्खास्त करते है|
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कश्यप किशोर मिश्र
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