Sunday, May 25, 2014

ओ कलकत्ता ! अर्थात अच्छे दिनों का कलकत्ता...(4)

रामप्रसाद को पार्टी पर्चों की बात समझ नहीं आती, उसके और उसके साथियों के मन में यह सवाल बार-बार उठता अब तो हिन्दुस्तान आजाद है, अब ये लाल झंडा वाले किराँति-किराँति क्यों चिल्लाते रहते है ?
लाल झंडा वालों नें उन्हें समझाया "सारा क्रांतिकारी लोग गोली-बंदूक खा के देश को स्वतंत्र किया, गरीब लोग के लिए, मगर अमीर लोग के लिए गाँधी-नेहरू मिल के गरीब-मजदूर से धोखा किया और स्वतंत्र देश को गणतंत्र कर दिया । हम क्रांति करेंगे और गरीब-मजदूर के लिए देश को फिर से स्वतंत्र करेंगे।"

बात सबके समझ में आ गई ।
कलकत्ता के अच्छे दिनों में गोएबल्स भी शर्मा जाता था ।
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कश्यप किशोर मिश्र

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