Friday, June 27, 2014

लाचार

...आखिरकार उसका शरीर पस्त हो गया । थक कर निढ़ाल हो चले शरीर से खड़े रहना भी कठिन हो रहा था |

अभी खूब सारे लोग बचे हुए थे, और वह अकेला जल्लाद !

बेचारा ! थक कर बैठ गया !

... लाचार !

_____________
कश्यप किशोर मिश्र

No comments: