...आखिरकार उसका शरीर पस्त हो गया । थक कर निढ़ाल हो चले शरीर से खड़े रहना भी कठिन हो रहा था |
अभी खूब सारे लोग बचे हुए थे, और वह अकेला जल्लाद !
बेचारा ! थक कर बैठ गया !
... लाचार !
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कश्यप किशोर मिश्र
अभी खूब सारे लोग बचे हुए थे, और वह अकेला जल्लाद !
बेचारा ! थक कर बैठ गया !
... लाचार !
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कश्यप किशोर मिश्र
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