Wednesday, February 5, 2014

हजरत गब्बर और उनका दल-बल

गब्बर= ओ रे कालिया तेरी बीबी अब भी तुझको पीटती है, का रे ?
कालिया= सरदार! हमरे बीच मार-कुटाई तो कभी नहीं होती थी !
गब्बर = चोप्प हरामखोर! जबाब हां या ना में दो |

(तभी बीच में बसंती आ जाती है)
बसंती= यूँ है, कि सरदार इसका मतलब यह हुआ कि हाँ बुलवाकर या ना बुलवाकर किसी भी तरह से तुम कालिया की बीबी को झगडालू दिखाना चाहते हो ! ये तो सरासर गलत बात है, गब्बर!

(दृष्य बदलता है और गब्बर गाववालो के बीच में है, कालिया और बसंती रस्सियों से बंधे हुए है)
गब्बर= सुनो -सुनो गावँ वालों, ई जो बसंती है न उसका कालिया से प्रेम चल रहा है, ई तो कालिया की बीबी से सरासर नाइंसाफी है |

(कालिया की बीबी दौड़ती आती है)
कालिया की बीबी= नहीं सरदार ! यह बात सरासर झूठ है |
गब्बर (चीखते हुए) - सूअर के बच्चो, सब के सब मिले हुए है, सब के सब अपराधी है |

गब्बर ने बन्दूक निकाली और गोलिया दाग दी | धाय-धाय -धाय ! कालिया, उसकी पत्नी और बसंती मारे जाते है |
गब्बर (स्वगत)- अरे, यह बन्दूक चलती भी है!
शान्भा- सरदार की जय हो ! सरदार ने गावँ को भ्रष्टाचारियो की अराजकता से मुक्त कर दिया |

(गावँ वाले नारे लगाते है "हजरत गब्बर की जय हो, हजरत गब्बर की जय हो"
नेपथ्य में गब्बर के गुण्डे उन लोगो की पिटाई कर रहे है, जो सच्ची बात कहना चाहते है|)


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कश्यप किशोर मिश्र 

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