Tuesday, February 11, 2014

होते होते रह गई क्रांतियाँ


मन क्रांतिकारी -क्रन्तिकारी हो रहा हो, तो चाय लाजिम है |
अक्सर क्रन्तिकारी मन को समय पे मिल गई कड़क चाय ने क्रांति में उबाल लाने का काम किया है |
कड़क चाय और पटियाला पैग का क्रांति में अमिट योगदान रहा है |
न जाने कई क्रांतिकारी बहस, चाय के आने तक मुल्तवी रही |

ऐसा भी हुआ, चाय नहीं मिल पाई और क्रांति होते होते रह गई |
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कश्यप किशोर मिश्र 

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