किरान्तिकारी को बड़ा क्रोध हो रहा था, धूप की चटक उसकी खोपड़ी को गरम किये दे रही थी | उसने जोर जोर से नारे लगाये "किरांती जिंदाबाद" "किरांती जिंदाबाद" उसने इधर उधर देखा, ऊपर नीचे देखा, आगे पीछे देखा |कही किरांती होती नज़र नहीं आई |
किरान्तिकारी ने तय किया अब वक़्त मरने-मारने का आ चुका है और अब उसे ही कुछ करना होगा |
उसने पिस्तौल निकाली और किरांती- किरांती चिल्लाता दौड़ पड़ा | सामने जुता खेत था | किरान्तिकारी ने जबसे दिमाग सम्हाला था, बस किरांती की थी| खेत खलिहान से उसका कोई सम्बन्ध रहा ही नहीं था| जुते खेत में वह दौड़ नहीं पाया और गिर पड़ा |
उसे गिरते देख, हल चला रहे किसान हँस पड़े | किरान्तिकारी उठा उसने अपनी पिस्तौल सम्हाली और किसानो पर पिस्तौल दाग दी | धायं! धाय! की आवाज के साथ हँसते किसान निष्प्राण हो गए |
किरान्तिकारी ने पिस्तौल से उठते धुंवे के बीच नली में एक फूंक मारी और बड़ी ही वितृष्णा से किसानो को देखते हुए सोचा "क्रांति के विरोधी " और बड़े संतोष से आगे बढ़ गया |
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कश्यप किशोर मिश्र
किरान्तिकारी ने तय किया अब वक़्त मरने-मारने का आ चुका है और अब उसे ही कुछ करना होगा |
उसने पिस्तौल निकाली और किरांती- किरांती चिल्लाता दौड़ पड़ा | सामने जुता खेत था | किरान्तिकारी ने जबसे दिमाग सम्हाला था, बस किरांती की थी| खेत खलिहान से उसका कोई सम्बन्ध रहा ही नहीं था| जुते खेत में वह दौड़ नहीं पाया और गिर पड़ा |
उसे गिरते देख, हल चला रहे किसान हँस पड़े | किरान्तिकारी उठा उसने अपनी पिस्तौल सम्हाली और किसानो पर पिस्तौल दाग दी | धायं! धाय! की आवाज के साथ हँसते किसान निष्प्राण हो गए |
किरान्तिकारी ने पिस्तौल से उठते धुंवे के बीच नली में एक फूंक मारी और बड़ी ही वितृष्णा से किसानो को देखते हुए सोचा "क्रांति के विरोधी " और बड़े संतोष से आगे बढ़ गया |
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कश्यप किशोर मिश्र
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