Wednesday, February 19, 2014

औरत क्या बस औरत नहीं हो सकती ?

औरतो को सामान मान लिया जाता है, जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करो, इस बात की जड़े इतनी गहरी है कि जबकि दोनों वाक्यों का मतलब वही होगा, पर अपने अवचेतन में हमेशा हम वाक्य संख्या 1) का इस्तेमाल ही करते है | "हमारी औरते" या "अपनी औरते" |

1) अगर तुम जानना चाहते हो कोई समाज कितना सभ्य है, तो यह देखो वह अपनी औरतों से कैसे पेश आता है | 

2)अगर तुम जानना चाहते हो कोई समाज कितना सभ्य है, तो यह देखो वह औरतों से कैसे पेश आता है | 

औरते क्या बस "औरते" नहीं हो सकती |
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कश्यप किशोर मिश्र 

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