Tuesday, May 20, 2014

मेरा वतन

इस मुल्क में एक शहर था कलकत्ता...
जिसके अच्छे दिनों का एक करीब तीस साला दौर चला |
यह शहर, हलाकि, था हिन्दुस्तान में ही,
पर वहाँ अच्छे दिन लाने वाले बाबू लोग 

अपनी अपनी आस्था के हिसाब से, 
चीन या रूस का नक्शा देखते ही कह उठते थे 
"ओह ! मेरा वतन"

_____________
कश्यप किशोर मिश्र 

No comments: