इस मुल्क में एक शहर था कलकत्ता...
जिसके अच्छे दिनों का एक करीब तीस साला दौर चला |
यह शहर, हलाकि, था हिन्दुस्तान में ही,
पर वहाँ अच्छे दिन लाने वाले बाबू लोग
अपनी अपनी आस्था के हिसाब से,
चीन या रूस का नक्शा देखते ही कह उठते थे
"ओह ! मेरा वतन"
_____________
कश्यप किशोर मिश्र
जिसके अच्छे दिनों का एक करीब तीस साला दौर चला |
यह शहर, हलाकि, था हिन्दुस्तान में ही,
पर वहाँ अच्छे दिन लाने वाले बाबू लोग
अपनी अपनी आस्था के हिसाब से,
चीन या रूस का नक्शा देखते ही कह उठते थे
"ओह ! मेरा वतन"
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कश्यप किशोर मिश्र
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