Thursday, July 31, 2014
Saturday, July 26, 2014
सहीफ़ो से छिटकी एक आयत
_____________________
गोश्त बस गोश्त होता है और जानवर बस जानवर ।
गोश्त चाहे सूअर का हो या गाय का, होता वह जानवर का गोश्त ही है।
पर जिबह की छूरी के चलनें की वजह अगर मजहबी नफरत हो तो गोश्त अपनी शक्ल भी बदल लेते है ।
लिहाजा नफरत की छूरी से जिबह गाय का गोश्त, सूअर का गोश्त बन जाता है और सूअर का गोश्त, गाय का गोश्त बन जाता है ।
(यह वह आयत है जो इंसान के गलीज मन को परख उतरी ही नहीं और सहीफों मे जा छुप बैठ गई ।)
_______________
कश्यप किशोर मिश्र
(आदमीयत की आखिरी किताब से)
गोश्त बस गोश्त होता है और जानवर बस जानवर ।
गोश्त चाहे सूअर का हो या गाय का, होता वह जानवर का गोश्त ही है।
पर जिबह की छूरी के चलनें की वजह अगर मजहबी नफरत हो तो गोश्त अपनी शक्ल भी बदल लेते है ।
लिहाजा नफरत की छूरी से जिबह गाय का गोश्त, सूअर का गोश्त बन जाता है और सूअर का गोश्त, गाय का गोश्त बन जाता है ।
(यह वह आयत है जो इंसान के गलीज मन को परख उतरी ही नहीं और सहीफों मे जा छुप बैठ गई ।)
_______________
कश्यप किशोर मिश्र
(आदमीयत की आखिरी किताब से)
Wednesday, July 23, 2014
Tuesday, July 22, 2014
Subscribe to:
Comments (Atom)




